26 जनवरी गणतंत्र दिवस के बारे में रोचक तथ्य !

गणतंत्र दिवस:-आज हम आपको 26 जनवरी यानि Republic Day से जुड़ी बातें बताएंगे,जो आपका सामान्य ज्ञान तो बढाएगी ही साथ में आपको मजेदार भी लगेगी।

1. भारत के तीन अवकाशों में से एक 26 जनवरी को हर साल हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में इसलिए भी चुना गया क्योकिं 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। 1950 में इसी दिन 10:18 मिनट पर भारतीय संविधान लागू किया गया था। और इसके 6 मिनट बाद भारत के पहले राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाऊस में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी।

2. भारतीय संविधान पूरी तरह से हाथ से लिखा गया था, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में है. हाथ से लिखी गई सविधान की असली काॅपी को हिलियम से भरे बक्शों में संसद भवन की लाइब्रेरी में रखा गया है।

3. गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति राजपथ पर तिरंगा फहराते है और प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति पर देश की आजादी में बलिदान देने वाले शहीदों को श्रृद्धाजंलि देते है।

4. 1950 से लेकर 1954 तक गणतंत्र दिवस की परेड के लिए कोई जगह फिक्स नही थी। कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में गणतंत्र दिवस मनाया जाता था। फिर 1955 में परेड के लिए राजपथ फिक्स कर दिया गया।

5. परेड के दौरान राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है. दरअसल, ये सलामी भारतीय सेना की 7 तोपों से दी जाती है. ये तोपें 1941 में बनाई गई थी. राष्ट्रगान शुरू होते ही पहली सलामी और फिर 52 सेकंड बाद आखिरी सलामी दी जाती है।

6. राजपथ पर हर झांकी 5KM/H की बहुत धीमी रफ्तार से चलती है ताकि देखने वाले अच्छी तरह से देख सके. झांकी के आगे चलने वाला सिपाही संगीत की ताल पर मार्च करता है और झांकी का ड्राइवर छोटी सी खिड़की से उसे देखता रहता है।

7. हर साल 26 जनवरी पर किसी न किसी देश को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाता है। पहले गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बने थे “इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णों”।

8. हर साल Republic Day की परेड के अंत में “Abide With Me” नाम का Christian song बजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये महात्मा गांधी का पसंदीदा गाना था।

9. गणतंत्र दिवस समारोह, समय की पूरी पाबंदी के साथ मनाया जाता है, हर सेकंड का हिसाब किया जाता है. मतलब, यदि समारोह 1 मिनट की देरी से शुरू हुआ है तो 1 मिनट की देरी से ही खत्म होगा।

10. शायद आपको ना पता हो, कि गणतंत्र दिवस समारोह 3 दिन तक चलता है. 29 जनवरी को विजय चौक पर “Beating Retreat Ceremony” का आयोजन करके गणतंत्र दिवस का समापन किया जाता है।

Updated Facts: भारत में साल में तीन दिन ऐसे आते है जब अखबार की भी छुट्टी होती है.. 26 जनवरी उनमें से एक है।

11. देश में राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड (Republic Day Parade) आयोजित होती है. यह परेड आठ किमी की होती है और इसकी शुरुआत रायसीना हिल से होती है. उसके बाद राजपथ, इंडिया गेट से होते हुए ये लाल किला पर समाप्‍त होती है।

12. 26 जनवरी, 1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड राजपथ के बजाय तत्‍कालीन इर्विन स्‍टेडियम (अब नेशनल स्‍टेडियम) में हुई थी. उस वक्‍त इर्विन स्‍टेडियम के चारों तरफ चारदीवारी नहीं थी और उसके पीछे लाल किला साफ नजर आता था।

13. 26 जनवरी 1950 को सुबह 10.18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया।

14. पूर्ण स्वराज दिवस (26 जनवरी 1930) को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू किया गया था।

15. राष्ट्रगान के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है. 21 तोपों की ये सलामी राष्ट्रगान की शुरूआत से शुरू होती है और 52 सेकेंड के राष्ट्रगान के खत्म होने के साथ पूरी हो जाती है।

जानिए गणतंत्र दिवस का इतिहास, महत्‍व और तथ्‍य

गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन हमारे देश में संविधान लागू हुआ किया गया था। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया था, लेकिन इसे लागू 26 जनवरी 1950 में किया गया था।

गणतंत्र दिवस (Republic Day) देश में हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान लागू हुआ, जिसके उपलक्ष्य में हम 26 जनवरी (26th January) को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया था, लेकिन इसे लागू 26 जनवरी 1950 में किया गया था। भीमराव अंबेडकर (B. R. Ambedkar) ने संविधान को दो साल, 11 महीने और 18 दिनों में तैयार कर राष्ट्र को समर्पित किया था। हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है. बता दें कि संविधान को बनाने वाली संविधान सभा में के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे।

गणतंत्र दिवस का इतिहास

गणतंत्र दिवस का इतिहास बड़ा ही रोचक है। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी (26 January) 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था. साल 1929 में दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ। इस अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार द्वारा 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमीनियन का दर्जा नहीं दिया गया तो भारत को पूर्ण रूप से स्‍वतंत्र देश घोषित कर दिया जाएगा।

26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके बाद स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा। भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से शुरू कर दिया. संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे।

भारतीय गणतंत्र के बारे में कितना जानते हैं आप…?

डॉ० भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयां थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 साल, 11 महीने और 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया।

जिसके बाद अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। इसलिए 26 जनवरी को हर साल गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था।

एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्‍वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती हैं।

इतिहास

सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाता, तो भारत अपने को पूर्णतः स्वतंत्र घोषित कर देगा।

26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।

इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयां थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवम्बर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है।

संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई।