Do You Know! How Power Full Our Sperm Is?

 

हमारे देश मे माता-पिता अक्सर अपने बच्चों से जीवन की कई महत्वपूर्ण अनुभव शेयर नही करते ज्यादातर संकोच की बजह से, जिसकी बजह से बच्चे अलग-अलग विषयो पर अपने माता-पिता के जगह उन चीजों और उन लोगो से जानकारी लेने शुरू कर देते है जो उन्हें बासना की गटर गंगा में धकेल देता है। ये लेख पढ़ने से पहले हमारी एक विनती है देश के हर अभिभावक हर माता-पिता से ओर खासकर कि हर बाप से की ये लेख अपने बच्चों अपने जिगर के टुकड़ो से शेयर जरूर करे, नही तो वो बड़ा होकर कोई ओर शक्स ही बन जायेगा या बन जाएगी। फिर वो आपका राजा बेटा या परी नही रह जायेगी इसलिए शेयर जरूर करियेगा। याद रखिये आपको सिर्फ बच्चों का भरोसा जीतना है फिर बच्चे अपनी जिंदगी खुद जीत लेंगे।

कितना किमती और पॉवरफुल है आपका स्पर्म ( वीर्य )….

क्या आप जानते है कि आपके एक सिर्फ एक माइक्रोस्कोपिक साइज के इस स्पर्म में 37.5 MB का DNA डाटा होता है। इस 37.5MB डाटा में आपकी आंखों का रंग, आपके बालों का कलर, आपकी स्किनटोन, कुछ जेनेटिक रोगों की जानकारी, ऊँचाई का डर, आपकी प्रवृद्धि, आपकी पर्सनैलिटी, आपकी Lifestyle से जुड़ी चीजे सब होती है। 50 प्रतिशत जेनेटिक गुण आपको अपने पिता से मिलती है और 50 प्रतिशत गुण आपको अपनी माता से मिलती है। ये आपके लाइफ एक्सपीरिंयस से रुझान सेट करती है, ये लेख बहुत Detail और दिलचस्प होता जाएगा बस आपको बनाये रखना है तो ध्यान।

अब आप सोचिये एक खलन के दौरान 20 से 30 करोड़ स्पर्म निकलते है, अगर हर स्पर्म में 37.5MB की जेनेटिक जानकारी होती है तो सोचिये आप एक खलन में कितना डाटा ट्रांसफर कर देने की झमता रखते है। लगभग 1500TB का डाटा जो समझ लीजिए 7500 लैपटॉप्स की ड्राइव स्पेस भर सकता है। वो बात अगल है कि एक खलन के दौरान निकले 20 से 30 करोड़ स्पर्म में से सिर्फ एक स्पर्म का डाटा जो कि 37.5MB का होता है बही काम आता है। ये 37.5MB डाटा तब पूर्ण होता है जब मादा के अंडाणु के 37.5MB डाटा से मिलता है। ये 75 MB जेनेटिक जानकारी एक मानव भूर्ण की बुनियाद रखती है जो कि माँ और बाप दोनो के DNA की कॉपी से बनता है नया शिशु, तो दोनों के ही गुण होने की संभावना होती है नये शिशु में।

लैपटॉप या जो स्मार्टफोन्स या फ़ोन्स ज्यादा हीट करते है उनको अपनी जंगो के ऊपर ना रखे इससे आपके शुक्राणु मर या नष्ट हो जाते है।

बार-बार हस्थमैथुन करना बंद करे ( बार-बार अपने स्पर्म को युही वेस्ट ना करे ) जांनिये नुकसान …

तो जो बन्दे हस्थमैथुन करते है उन्हें रुक जाना चाहिए, पुरुष महिला के साथ संबंध बनाने के लिए है अकेले नही। आप ये सोचिये की आपके एक खलन में कई करोड़ स्पर्म होते है और सब यूनिक होते है, सब अलग होते है एक दूसरे से। जो एक स्पर्म इनमे से अंडाणु से स्पर्श करता है वह आपका वंश आगे बढ़ाता है। ऐसे में इतनी महत्वपूर्ण जेनेटिक जानकारी आपके द्वारा सिर्फ चंद मिनटों के सुख के लिए अगर बहा दी जाए तो ये आपके वंश के लिए एक बहुत ही घृणित बात होंगी।बार-बार हस्थमैथुन करना आज ही बंद करे। एक और लेख का लिंक हम नीचे देंगे उसे जरूर पढ़िए शायद इस बुरी आदत से आपको निजात मिल जाए।

ये बात तो आप समझ ही गये होंगे कि आपका स्पर्म सिर्फ एक सफेद चिपचिपा गंदा पदार्थ नही है जिसके बारे में बात करना आप लोगो को घृणा का पात्र बनायेगा, बल्कि आपके स्पर्म में आपके पूर्खो और आपके गुण होते है जो कि आपके पुश्तों को सारे Tools और तरीके देके जाती है तो वीर्य ( स्पर्म ) का सम्मान कीजिये ये घृणा की चीज तो बिल्कुल भी नही है और टॉयलेट में बहाने के लिए तो बिल्कुल भी नही बनी। और आपकी आदतों को अच्छा रखिये क्योकि आपके खानपान का असर आपके स्पर्म पर पड़ता है।

Some More Facts about Sperms…

वीर्य आदमी के अंडकोष और अंग के मार्ग में मौजूद प्रोस्टै्रट, सैमाइनल वैसिकल और यूरेथल ग्रंथियों से निकले रसों से बनता है. वीर्य में तकरीबन 60 फीसदी सैमाइनल वैसिकल, 30 फीसदी प्रोस्ट्रैट ग्रंथि का रिसाव और केवल 10 फीसदी अंडकोष में बने शुक्राणु यानी स्पर्म होते हैं, जो वीर्य में तैरते रहते हैं. शुक्राणु की मदद से ही बच्चे पैदा होते हैं.

अंडकोष यानी शुक्राशय आदमी के शरीर के बाहर लटके होते हैं, क्योंकि शुक्राणु बनने के लिए शरीर से कुछ कम तापमान की जरूरत होती है|

अगर किसी वजह से अंडकोष अंदर ही रह जाते हैं, तो ये खराब हो जाते हैं. शुक्राशय के 2 काम हैं, शुक्राणु बनाना और पुरुषत्व हार्मोन टैस्ट्रोस्ट्रान बनाना.

टैस्ट्रोस्ट्रान कैमिकल ही आदमी में क्रोमोसोम के साथ लिंग तय करता है. इसी के चलते बड़े होने पर लड़कों में बदलाव होते हैं, जैसे अंग के आकार में बढ़ोतरी, दाढ़ीमूंछें निकलना, आवाज में बदलाव, मांसपेशियों का ताकतवर होना वगैरह.

किशोर उम्र तक शुक्राशय शुक्राणु नहीं बनाते. ये 11 से 13 साल के बीच शुरू होते हैं और तकरीबन 17-18 साल तक पूरी तेजी से बनते हैं.

अंडकोष से निकल कर शुक्राणु इस के ऊपरी हिस्से में इकट्ठा हो कर पकते हैं. यहां पर ये तकरीबन एक महीने तक सक्रिय रहते हैं. शुक्राणु बनने की पूरी प्रक्रिया में 72 दिन का समय लगता है.

किशोर उम्र में बनना शुरू हो कर शुक्राणु जिंदगीभर बनते रहते हैं. हां, अधेड़ उम्र में इस के बनने की रफ्तार धीमी हो जाती है|

शुक्राणु के बनने में दिमाग में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि, एफएसएच हार्मोन व टैस्टीज से निकले टैस्ट्रोस्ट्रान हार्मोन का हाथ होता है. इन हार्मोनों की कमी होने पर शुक्राणु बनना बंद हो जाते हैं|

वीर्य में मौजूद शुक्राणु 2 तरह के होते हैं, 3 3 या 3 4. अगर औरत के अंडे का मिलन 3 3 से होता है, तो लड़की और अगर 3 4 से होता है, तो लड़का पैदा होता है|

मां के पेट में बच्चे का लिंग आदमी के शुक्राणुओं द्वारा तय होता है. इस में औरत का कोई बस नहीं होता है|

वीर्य में सब से ज्यादा रस सैमाइनल वैसिकल ग्रंथि से निकले पानी से होता है. इस में फ्रक्टोज शुक्राणुओं का पोषक तत्त्व होता है. इस के अलावा रस में साइट्रिक एसिड, प्रोस्ट्राग्लैंडिन और फाइब्रोजन तत्त्व भी पाए जाते हैं.

प्रोस्ट्रैट ग्रंथि का रस दूधिया रंग का होता है. इस में साइट्रेट, कैल्शियम, फास्फेट, वीर्य में थक्का बनाने वाले एंजाइम और घोलने वाले तत्त्व होते हैं. इन में अलावा मूत्र में स्थित यूरेथल ग्रंथियों का रिसाव भी वीर्य में मिल जाता है.

स्खलन के समय शुक्राशय से निकले शुक्राणु सैमाइनल वैसिकल व प्रोस्टै्रट के स्राव के साथ मिल कर शुक्र नली द्वारा होते हुए मूत्र नलिका से बाहर हो जाते हैं.

यह भी जानें….

  1. एक बार में निकले वीर्य की मात्रा 2 से 5 मिलीलिटर होती है.
  2. वीर्य चिकनापन लिए दूधिया रंग का होता है और इस में एक खास तरह की गंध होती है.
  3. वीर्य का चिकनापन सैमाइनल वैसिकल व पीए प्रोस्टै्रट के स्राव के चलते होता है. अगर पीए अम्लीय है, वीर्य पीला या लाल रंग लिए है, तो यह बीमारी की निशानी है.
  4. वीर्य से बदबू आना भी बीमारी का लक्षण हो सकता है.
  5. 2-3 दिन के बाद निकला वीर्य गाढ़ा होता है, क्योंकि इस में शुक्राणुओं की संख्या ज्यादा होती है.
  6. वीर्य निकलने के बाद जम जाता है. पर इस में मौजूद रसायन फाइब्रोलाइसिन एंजाइम इसे 15-20 मिनट में दोबारा पतला कर देते हैं. अगर वीर्य दोबारा पतला न हो, तो यह बीमारी की निशानी है.
  7. 4-5 दिन बाद एक घन मिलीलिटर वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या 8 से 12 करोड़ होती है. यानी एक बार में तकरीबन 40 करोड़ शुक्राणु निकलते हैं, पर एक ही शुक्राणु अंडे को निषेचित करने के लिए काफी होता है.
  8. अगर वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या 6 करोड़ प्रति मिलीलिटर से कम हो, तो आदमी में बच्चे पैदा करने की ताकत कम होती है. अगर 2 करोड़ से कम हो, तो आदमी नामर्द हो सकता है.
  9. सामान्य शुक्राणु छोटे से सांप की शक्ल का होता है. इस का सिरा गोल सा होता है और सिर पर एक टोपी होती है, जिस को एक्रोसोम कहते हैं. साथ में गरदन, धड़ और पूंछ होती है.
  10. अगर शुक्राणुओं के आकार में फर्क हो, तब भी बच्चे पैदा करने की ताकत कम हो जाती है. यह फर्क सिर, धड़ या पूंछ में हो सकता है. अगर असामान्य शुक्राणुओं की संख्या 20 फीसदी से भी ज्यादा होती है, तो आदमी नामर्द हो सकता है.
  11. स्पर्म बनने में लगने वाला समय :- वैसे तो पुरुषों के अंडकोष में हमेशा स्पर्म बनता रहता है लेकिन किसी भी स्पर्म को पूरी तरह परिपक्व होने और प्रजनन के लिए बिलकुल तैयार होने में लगभग 46 से 72 दिनों तक का समय लग जाता है.
  12. जीवनचक्र :- स्पर्म का जीवन चक्र अलग जगहों पर अलग होता है जैसे कि स्खलन के बाद जब स्पर्म महिला के शरीर में प्रवेश कर जाता है तो आपके स्पर्म वहां पांच दिन तक जीवित रह सकते हैं, वहीँ अगर ये किसी सूखी जगह पर रहें तो ये वीर्य के सूखते ही मर जाते हैं. अगर आप वीर्य को किसी गर्म टब में स्खलित करें तो ये स्पर्म घंटो तक सतह पर तैरते रहते हैं.
  13. स्पर्म का तापमान :- जब आप सेक्स कर रहे होते हैं उस दौरान आपका शरीर काफी गर्म हो जाता है लेकिन शायद आपको यह नहीं पता कि स्पर्म का तापमान, हमेशा शरीर के तापमान से लगभग 7 डिग्री कम होता है. अंडकोष में इसी तापमान में स्पर्म सुरक्षित और स्वस्थ रहते हैं.
  14. स्वस्थ स्पर्म :- जितने भी स्पर्म शरीर से बाहर निकलते हैं उनमें से सभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं होते हैं बल्कि उनमें 90% स्पर्म ख़राब होते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि आपके स्वास्थ्य में कोई खराबी है बल्कि यह सामान्य बात है. वास्तव में जब ये स्पर्म अंडे की तरफ जाते हैं तो उस दौड़ में कई स्पर्म पीछे ही छूट जाते हैं, सिर्फ हेल्दी स्पर्म ही अंडों तक पहुँच पाते हैं.
  15. लिंग का निर्धारण:- शायद आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आपके बच्चे का सेक्स पूरी तरह आपके स्पर्म पर ही निर्भर करता है. कुछ स्पर्म में एक्स क्रोमोसोम (फीमेल) और कुछ में वाई क्रोमोसोम (मेल) होता है और इन्ही के हिसाब से बच्चे के लिंग का निर्धारण होता है.
  16. पर्याप्त स्पर्म :- वैसे सामान्य तौर पर पुरुषों में दो अंडकोष होते हैं जिनमें हमेशा स्पर्म और वीर्य बनता रहता है लेकिन अगर किसी ख़ास के पास सिर्फ एक ही अंडकोष है फिर भी इससे उसकी प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है.
  17. आप सभी से सादर विनती हैं की अपने वीर्य या स्पर्म को व्यर्थ न करें…इसे हिफाज़त करें..जिस तरह जल ही जीवन है उसी तरह ही वीर्य या स्पर्म जीवन है|

If You Liked Our Article then please Share It.